Ausubel Learning Theory 2022

डेविड पॉल औसुबेल  /  शाब्दिक अधिगम परिभाषा

Ausubel Learning Theory इस बात से संबंधित है कि कैसे व्यक्ति स्कूल की सेटिंग में मौखिक / पाठ्य प्रस्तुतियों से बड़ी मात्रा में सार्थक सामग्री सीखते हैं (प्रयोगशाला प्रयोगों के संदर्भ में विकसित सिद्धांतों के विपरीत) 

नए ज्ञान को पुराने में कैसे एकीकृत किया जाता है.यह सीखने का सबसे बुनियादी रूप है। इसमें, व्यक्ति प्रतीकों को वास्तविकता के उस ठोस और उद्देश्यपूर्ण भाग से जोड़कर अर्थ देता है जिसे वे आसानी से उपलब्ध अवधारणाओं का उपयोग करते हुए संदर्भित करते हैं.

मनोवैज्ञानिक डेविड ऑसुबेल के अनुसार, उनका सिद्धांत ( Ausubel Learning Theory ) यह सुनिश्चित करता है कि इस प्रकार की शिक्षा को माना जाता है पुरानी जानकारी को नई जानकारी से संबंधित करने की क्षमता और हाल ही में अधिग्रहीत, उन्हें गठबंधन करने में सक्षम होने के लिए, ज्ञान का विस्तार करने और यदि आवश्यक हो तो इसका पुनर्निर्माण करने के लिए।

निर्माणवादी मनोविज्ञान के सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों में से एक: डेविड ऑसुबेल का थ्योरी ऑफ़ सार्थक लर्निंग वह 25 अक्टूबर, 1918 को न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे डेविड पॉल औसुबेल एक मनोवैज्ञानिक और शिक्षाविद थे जो रचनात्मक मनोविज्ञान के महान संदर्भों में से एक थे। 1963 और 1968 के बीच, डेविड ऑसुबेल ने अपने सिद्धांत के अनुसार सार्थक सीखने की अवधारणा प्रकाशित की जैसे कि, उन्होंने छात्र के पास जो ज्ञान है, उसके आधार पर शिक्षण को विकसित करने पर बहुत जोर दिया.

यही है, शिक्षण के कार्य में पहला कदम यह पता लगाना चाहिए कि छात्र को उनके सोचने के तरीके के पीछे के तर्क को जानने और उसके अनुसार कार्य करने के लिए क्या पता है।.

Ausubel Learning Theory

 ऑसुबेल के अनुसार अधिगम के प्रकार  ( Types Of Ausubel Learning Theory )

 1. अभिग्रहण सीखना                    

अभिग्रहण सीखना में शिक्षार्थी को सीखने वाली सामाग्री बोलकर या लिख कर दे दी जाती है और शिक्षार्थी उन सामग्रियों को आत्मसार्थ कर लेते हैं । दुर्भाग्यवश अधिकतर शिक्षक यही समझते हैं कि अभी ग्रहण सीखना मात्र रटकर ही सिखा जा सकता है परंतु Ausubel Learning Theory ने स्पष्ट कर दिया है कि यह रटकर भी हो सकता है तथा समझकर भी हो सकता है

2. अन्वेषण सीखना

अन्वेषण सीखना वैसे सीखना को कहा जाता है जिसमें शिक्षार्थी को दी गई सामग्रियों में से नए संप्रत्यय या कोई नया नियम या विचार की खोज कर उसे सिखाना होता है। दुर्भाग्यवश अधिकतर शिक्षक यही समझते हैं कि अन्वेषण सीखना हमेशा अर्थ पूर्ण ही होता है परंतु उसूबेल ने यह स्पष्ट किया है कि कभी यह अर्थ पूर्ण भी हो सकता है या कभी लौटकर भी संपन्न हो सकता है

3. रटकर सीखना

सीखने को कहा जाता है जिसमें शिक्षार्थी दिए गए सामग्रियों के साहचर्य शब्दशह तथा मनमाने ढंग से उसके आशय को बिना समझे हुए सीखते हैं। निरर्थक पदों का सीखना, शब्दों के जोड़े को सीखना, इसी श्रेणी के सीखने का उदाहरण है

4. अर्थपूर्ण सीखना

उसोबेल  के अनुसार इस तरह का सीखना शिक्षा के लिए विशेष महत्व रखता है। इसलिए शिक्षकों में विशेष तरह के सीखने पर अधिक बल डाला जाता है अर्थ पूर्ण सीखना ओवैसी सीखने को कहा जाता है जिसमें सीखने वाले सामग्री के सारतत्व को एक नियम के अनुसार समझ कर तो था उसका संबंध गत ज्ञान से जोड़ते हुए सिखा जाता है

आसुबेल ने दो प्रमुख सिद्धांतों पर बल दिया है –

  1. प्रथम सिद्धांत प्रगतिशील विभेदीकरण का है, जिसमें सर्वप्रथम विषय संबंधी सामान्य विचार प्रस्तुत किये जाते हैं तथा उसके उपरांत धीरे – धीरे उनके विस्तार से विभेदीकरण द्वारा जानकारी दी जाती है। यह एक क्रमिक संरचना है, जिसमें विभिन्न प्रत्ययों का बोध संभव है।
  2. दूसरा सिद्धांत पूर्व ज्ञात पाठ्य – वस्तु के आधार पर नये विचारों को संगठित करना तथा समझना है। इस तरह पाठ्य – वस्तु को एक क्रमिक रूप में व्यवस्थित किया जाता है। ज्ञान धीरे – धीरे पूर्व ज्ञान के आधार पर आगे बढ़ता है। पाठ्य – वस्तु के प्रत्येक भाग से पूर्व एक संगठित प्रत्यय उपस्थित रहता है, जो गतिशील संगठनकर्ता का कार्य करता है।

आसुबेल के सिद्धांत का पाठ्यक्रम की दृष्टि से महत्व :

आसुबेल के विषय – वस्तु एवं ज्ञानात्मक ढाँचे के प्रति दिये गये विचार महत्वपूर्ण हैं तथा उनका पाठ्यक्रम संगठन तथा निर्देशात्मक प्रक्रिया से सीधा संबंध हैं। उनके पाठ्यक्रम संगठन के संबंध में दो सिद्धांत हैं –

  1. विकासात्मक भेदीकरण
  2. एकीकृत समाधान

1. विकासात्मक विभेदीकरण 

प्रथम सिद्धांत Ausubel Learning Theory से आसुबेल का तात्पर्य है कि पाठ्यक्रम निर्माण करते समय इस बात का ध्यान रखा जाये कि सामान्य विचार.पहले प्रस्तुत हों एवं धीरे – धीरे उनका विस्तृत तथा विशिष्ट रूप विकसित हो।

2. एकीकृत समाधान

दूसरे सिद्धांत Ausubel Learning Theory, ‘एकीकृत समाधान’ से उनका अभिप्राय है कि पाठ्यक्रम संगठन इस रूप में हो कि नये विचार पूर्व सीखने की विषय – वस्त से चेतन रूप में सीधे जुड़े हों।

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