Bruner Cognitive Development Theory 2022

Bruner Cognitive Development Theory : संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त ब्रूनर (1915-2016) एक अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे। जिन्होंने अपने विचारों के माध्यम से अपना स्थान मनोविज्ञान में प्रसिद्ध किया। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से जानेंगे कि ब्रूनर का संज्ञानात्मक विकास क्या हैं?  प्रतिपादन जेरोम ब्रूनर नामक अमेरिकन मनोवैज्ञानिक

Bruner Cognitive Development Theory

Bruner Cognitive Development Theory के संज्ञानात्मक विकास का विभाजन :

  1. क्रियात्मक अवस्था
  2. प्रतिबिम्बात्मक अवस्था
  3. संकेतात्मक अवस्था

Bruner Cognitive Development Theory

(1.) सक्रियता विधि /क्रियात्मक अवस्था, (Enactive Mode) ( जन्मे से 18 माह तक )

इस विधि में शिशु अपनी अनुभूतियों को शब्दहीन क्रियाओं के द्वारा व्यक्त करता है। जैसे -भूख लगने पर रोना, हाथ-पैर हिलाना आदि इन क्रियाओं द्वारा बालक वाह्य वातावरण से सम्बन्ध स्थापित करता है।

उदाहरण अगर आप किसी बच्चें को कोई खिलौना देते हैं। तो वो उसके साथ विभिन्न प्रकार की क्रिया करके देखता हैं। जैसे- उसको मुह में डालना या उसको घुमा-घुमा के देखना।

(2) प्रतिबिम्बात्मक अवस्था/  दृश्य प्रतिमा विधि (Iconic Mode) ,(18 से 7 वर्ष )

 इस विधि में बालक अपनी अनुभूति को अपने मन में कुछ दृश्य प्रतिमांए ;टपेनंस पउंहमेद्ध-बनाकर प्रकट करता है। इस अवस्था में बच्चा प्रत्यक्षीकरण के माध्यम से सीखता है।

उदाहरण इस आयु में छात्रों को किसी वस्तु को याद कराने के लिए उस वस्तु का चित्र दिखाना पड़ता हैं। जैसे- पतंग,सेब,जहाज आदि।

(3) सांकेतिक विधि (Symbolic Mode) (7 वर्ष की आयु से आगे  )

इस विधि में बालक अपनी अनुभूतियों को ध्वन्यात्मक संकेतो (भाषा) के माध्यम से व्यक्त करता है। इस अवस्था में बालक अपने अनुभवों को शब्दों में व्यक्त करता। इस प्रकार बालक प्रतीकों (Symbols) का उनके मूल विचारों से सम्बन्धित करने की योग्यता का विकास करता है।

उदाहरण बच्चे से अगर कहा जाए शेर तो वह उसका चित्र अपने मस्तिष्क में देख कर उसे अनुभव कर उससे संबंधित विचारों को ग्रहण करने लगते हैं। इसमें छात्रों को व्याख्यान करके आसानी से सिखाया जा सकता हैं।

 

ब्रूनर के सिद्धान्त की शिक्षा में उपयोगिता ( Use of Bruner Cognitive Development Theory )

  1. Bruner Cognitive Development Theory की विभिन्न अवस्थाओं के अनुसार पाठ्यक्रम का निर्माण करना चाहिए।
  2. ब्रूनर ने मानसिक अवस्थाओं का वर्णन किया। इन अवस्थाओं के अनुसार शिक्षण विधियों व प्रविधियों का प्रयोग करना चाहिये।
  3. इनकी अन्वेषण विधि द्वारा छात्रों में समस्या समाधान की क्षमता का विकास किया जा सकता है।
  4. ब्रूनर ने सम्प्रत्यय को समझने पर बल दिया अतः शिक्षक को विषय ठीक से समझाने चाहिये। इसके ज्ञान से छात्र पर्यावरण को समझ कर उसका उपयोग कर सकता है।
  5. इन्होंने वर्तमान अनुभवों को पूर्व ज्ञान एवं अनुभव से जोड़ने पर बल दिया। इससे छात्रों के ज्ञान को समृद्ध एवं स्थाई बनाया जा सकता है।
  6. Bruner Cognitive Development Theory की अवस्थाओं के अनुसार शिक्षक, अपने नियोजन (Planning) क्रियान्वयन (Execution) एवं मूल्यांकन (Evaluation) प्रक्रिया में संशोधन कर बालकों के बौद्धिक विकास में सहायक हो सकते हैं।

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