Construction and Characteristics of Good Test 2022

Construction and Characteristics of Good Test

Construction and Characteristics of Good Test

Construction and Characteristics of Good Test महत्वपूर्ण परिभाषाएं

क्रानबेक महोदय

Construction and Characteristics of Good Test एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण वह व्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसके द्वारा दो या अधिक व्यक्तियों के व्यवहार का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है।

डगलस व हॉलैण्ड

“उत्तम परीक्षण में अनेक विशेषताओं का होना आवश्यक है, और ये विशेषताएँ प्रत्येक परीक्षण के निर्माण के आधारभूत सिद्धान्त हो जाते हैं।”

फ्रीमैन महोदय

‘‘मनोवैज्ञानिक परीक्षण एक मानकीकृत यन्त्र है, जिसके द्वारा समस्त व्यक्तित्व के एक पक्ष अथवा अधिक पक्षों का मापन शाब्दिक या अशाब्दिक अनुक्रियाओं या अन्य प्रकार के व्यवहार माध्यम से किया जाता है।’’

ब्राउन के अनुसार

‘‘व्यवहार प्रतिदर्श के मापन की व्यवस्थित विधि ही मनोवैज्ञानिक परीक्षण हैं।’’

Construction and Characteristics of Good Test विशेषताएँ

  1. वैधता (Validity)
  2. विश्वसनीयता (Reliability)
  3. वस्तुनिष्ठता
  4. व्यापकता
  5. विभेदीकरण
  6. वैधता (Validity)

Construction and Characteristics of Good Test

वैधता (Validity)

  • सी० वी० गुड के अनुसार “ वैधता वह सीमा अथवा विस्तार है, जिस तक परीक्षा उसे मापती है, जिसे वह मापना चाहती है।”
  • रिजलैंड के अनुसार-” वैधता एक मापन-साधन को मापने वाला गुण होती है जिसे वह मापना चाहती है।”
  • ग्रीन महोदय- “वैधता उस मात्रा की एक अभिव्यक्ति का नाम है जहाँ तक एक परीक्षा उन गुणों, योग्यताओं कौशलों तथा सूचानाओं को मापती है जिन्हें मापने के लिए वह वाँछित होती हैं।”

वैधता का अर्थ है कि किसी परीक्षण को जिस उद्देश्य की प्राप्ति के लिये बनाया गया है, वह परीक्षण उस उद्देश्य को पूरा कर रहा है या नही। यदि परीक्षण अपने उद्देश्य को पूरा करने में सकल होता है तो उसे वैध माना जाता है और इसके विपरीत उद्देश्य पूरा करने में सक्षम नहीं होता है तो उसे वैध नहीं माना जाता है।

“ वैधता का तात्पर्य किसी मनोवैज्ञानिक परीक्षण की उस विशेषता से है, जिससे पता चलता है कि परीक्षण उस चीज को मापने में कहाँ तक सकल है, जिसको मापने के लिए अपेक्षा की जाती है।

वैधता के प्रकार-

मनोवैज्ञानिक परीक्षण की वैधता के अनेक प्रकार होते है, जिनका नामोल्लेख है-

  1. घटक वैधता
  2. समवर्ती वैधता
  3. भविष्यवाणी वैधता इत्यादि।

विश्वसनीयता (Reliability)

  • क्लासमियर व गुडविन“विश्वसनीयता उस सीमा का उल्लेख करती है, जिस सीमा तक परीक्षण द्वारा प्राप्त मापनों में समानता या स्थिरता होती है।”

किसी भी परीक्षण के विश्वसनीय होने का अर्थ यह है कि समान शर्तों के साथ यदि किसी परीक्षण को किसी भी समय एवं स्थान पर प्रयुक्त किया जाये तो उससे प्राप्त होने वाले परिणाम प्रत्येक बार समान ही हो, उनमें अन्तर ना हो। “ विश्वसनीयता का तात्पर्य निर्णय की संगति से है। “

एक विश्वसनीय परीक्षण उसे कहते है, जिसके द्वारा भिन्न-भिन्न समयों में प्राप्त परिणामों में संगति तथा सहमति पायी जाती है। विश्वसनीय परीक्षण संगत होता है, स्थिर होता है।”

विश्वसनीयता निर्धारित करने की विधियाँ – 

किसी परीक्षण की विश्वसनीयता को निर्धारित करने की चार विधियाँ हैं-

  1. परीक्षण-पुर्नपरीक्षण विधि
  2. अर्ध-विच्छेद विधि
  3. समानान्तर कार्म विधि
  4. तर्कसंगत समता विधि

वस्तुनिष्ठता

  1. ये बनावट में सरल एवं छोटे होते हैं।
  2. इनका उत्तर संक्षिप्त तथा केवल एक ही होता है।
  3. यदि इनकी जाँच विभिन्न परीक्षणों द्वारा की जाये तो इनके द्वारा प्रदान किये गये अंक समान होते हैं।
  4. इन परीक्षणों का अंकन शीघ्रता एवं सुगमता से किया जा सकता है।
  5. ये परीक्षण परीक्षक के व्यक्तिगत प्रभाव से प्रभावित नहीं होते हैं।
  6. पाठ्यक्रम की दृष्टि से ये परीक्षाएँ अधिक व्यापक होती हैं जिससे पाठ्यक्रम के अधिकांश भाग का परीक्षण संभव है।

व्यापकता

व्यापकता मनोवैज्ञानिक परीक्षण एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विशेषता है।

व्यापकता का अर्थ है- सीमित एवं संकुचित दृष्टिकोण का न होना अर्थात- विस्तृत होना। यहाँ पर मनोवैज्ञानिक परीक्षण की व्यापकता का अर्थ यह है कि वह परीक्षण जिस गुण, योग्यता अथवा क्षमता को मापने के लिये बनाया गया है, वह उस गुण योग्यता या क्षमता को सभी पक्षों का समुचित ढंग से मापन करता है या नहीं।

यदि वह परीक्षण उस गुण या योग्यता के सभी पक्षों का सही ढंग से मापन करने में सक्षम होगा, तो यह माना जायेगा कि उसमें व्यापकता का गुण विद्यमान है और यदि एक पक्ष का ही मापन करेगा तो माना जायेगा कि उसका दृष्टिकोण सीमित है व्यापक नहीं।

विभेदीकरण

विभेदीकरण से तात्पर्य परीक्षण के उस गुण से होता है जिसके द्वारा पढ़ने में तेज, सामान्य एवं पिछड़े हुये छात्रों के मध्य काफी सीमा तक भेद किया जा सके।

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