Kopen Ka Jalvayu Vargikaran | राजस्थान या कोपेन का जलवायु वर्गीकरण

राजस्थान या कोपेन की जलवायु ( Kopen Ka Jalvayu Vargikaran ) के महत्वपूर्ण तथ्य:

  • सर्वाधिक गर्म /उष्ण जिला – चुरू
  • सर्वाधिक गर्म स्थान- फलोदी (जोधपुर)
  • सर्वाधिक ठंडा/शीत जिला – चुरू
  • सर्वाधिक ठंडा/शीत स्थान – माउंट आबू
  • सर्वाधिक वार्षिक तापांतर वाला जिला- चूरु
  • सर्वाधिक दैनिक तापांतर वाला जिला – जैसलमेर ✓न्यूनतम तापांतर- बांसवाड़ा
  • औसत वार्षिक वर्षा – 57cm होती है इसका वितरण 10 से 100 सेमी तक है
  • राज्य में सर्वाधिक वर्षा जुलाई-अगस्त
  • सर्वाधिक वर्षा /आर्द्रता वाला जिला – झालावाड़ सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान – माउंट आबू
  • नुनतम वर्षा / आर्द्रता वाला जिला – जैसलमेर
  • न्यून वर्षा / आर्द्रता वाला स्थान – सम ,जैसलमेर
  • औसत वर्षा 29 दिन होती है
  • दक्षिण पूर्व से उत्तर पश्चिम की ओर वर्षा के दिनों में कमी आती हैं
  • सर्वाधिक वर्षा झालावाड़ में – 40 दिन
  • सबसे कम वर्षा जैसलमेर में – 5 दिन
  • सर्वाधिक आद्र महीना- अगस्त
  • न्यूनतम आद्र महीना – अप्रैल
  • सर्वाधिक परिवर्तनशीलता वर्षा में – जैसलमेर ,जालौर ✓वर्षा में सबसे कम परिवर्तनसिलता – बांसवाड़ा और झालावड़
  • सर्वाधिक धूल भरी आंधियां – गंगानगर (27 दिन) ✓सबसे कम धूल भरी आंधियां – अजमेर ,झालावाड़ (3 दिन)
  • सर्वाधिक वाष्पन और वाष्पोसर्जन – जैसलमेर क्योंकि इस सत्र में वनस्पति का आवरण कम पाया जाता है
  • न्यूनतम वाष्पन और वाष्पोसर्जन की दर – बांसवाड़ा दक्षिण राजस्थान में होती है क्योंकि क्षेत्र में वनस्पति का आवरण पाया जाता है
  • वर्षा ऋतु में पश्चिमी राजस्थान में वर्शन की तुलना में वाष्पन और वाष्पसर्जन की दर अधिक पाई जाती हैं अतः इस क्षेत्र में अधीषेस जल की मात्रा कम होती है ✓दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान में वर्षा ऋतु में वर्शन की तुलना में वाष्पन और वाष्प उत्सर्जन की दर कम पाई जाती है अतः इस सत्र में अधिशेष जल की मात्रा अधिक होती है
  • बांसवाड़ा और सिरोही में सर्वाधिक अधिशेष जल पाया जाता है
  • जैसलमेर में सबसे कम अधिशेष जल

राजस्थान का जलवायु वर्गीकरण

भारतीय मौसम विभाग ने तापमान वर्षा और जलवायु के आधार पर राजस्थान को 5 जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया है

  1. -शुष्क जलवायु प्रदेश
  2. – अर्ध शुष्क जलवायु प्रदेश
  3. – उपद्र जलवायु प्रदेश
  4. – आद्र जलवायु प्रदेश
  5. – अति आद्र जलवायु प्रदेश
Kopen Ka Jalvayu Vargikaran
Kopen Ka Jalvayu Vargikaran

1- शुष्क जलवायु प्रदेश

  •  वर्षा- 20 सेमी से कम
  • जैसलमेर ,बाड़मेर ,बीकानेर ,गंगानगर और चूरु को इसमें शामिल किया गया है
  • यहां ग्रीष्म काल में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से 50 डिग्री सेल्सियस
  • शीतकाल में तापमान 0 डिग्री सेल्सियस से 28 डिग्री सेल्सियस पाया जाता है
  • इस क्षेत्र में मरुधभिद/जीरोफाइड बनस्पति पाई जाती है यहां दैनिक तापांतर अधिक पाया जाता है
  • ग्रीष्मकाल जिसमें धूल भरी आंधियां चलती है
  • शीतकाल में चक्रवती वर्षा होती है

2-अर्ध शुष्क जलवायु प्रदेश

  • वर्षा 20 से 40 सेमी
  • यहां स्टेपितुलय वनस्पति पाई जाती है
  • ग्रीष्मकाल का तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से 42 डिग्री सेल्सियस तक
  • शीतकाल का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से 27 डिग्री सेल्सियस तक
  • जालौर, पाली ,जोधपुर ,नागौर , सीकर, झुंझुनू शामिल किया गया है

3- उप आर्द्र जलवायु प्रदेश

  • वर्षा – 40 से 60 सेमी
  • ग्रीष्म काल में तापमान 28 डिग्री सेल्सियस से 36 डिग्री सेल्सियस तक
  • शीतकाल में तापमान 12 डिग्री सेल्सियस से 16 डिग्री सेल्सियस तक
  • अजमेर, जयपुर ,दोसा पूर्व सीकर को शामिल किया गया है

4- आर्द्र जलवायु प्रदेश

  • वर्षा – 60 से 80 सेंटीमीटर
  • ग्रीष्म काल में तापमान 30 से 34 डिग्री
  • पूर्वी राजस्थान के अलवर, भरतपुर ,धौलपुर ,सवाई माधोपुर, टोंक, बूंदी ,राजसमंद, चित्तौड़गढ़ को शामिल किया गया है

5-अति आर्द्र जलवायु प्रदेश

  • वर्षा – 80से 100 cm
  • ग्रीष्म काल में तापमान ऊंचाई वाले क्षेत्रों को छोड़कर 40 डिग्री सेल्सियस तक शीतकाल सामान्य होता है इसमें सवाना तुझे वनस्पति पाई जाती है
  • कोटा, बारा,झालावाड़ ,उदयपुर ,सिरोही ,प्रतापगढ़ को शामिल किया गया है

कोपेन का जलवायु वर्गीकरण

कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के लिए कैंडल के वनस्पति मानचित्र को आधार बनाया है

कैंडोर ने संपूर्ण विश्व की वनस्पति को 5 भागों में विभाजित किया है

1- मेघा थर्मल-अधिकता वाली वनस्पति

2- मिजो थर्मल – मध्यम ताप वाली वनस्पति

3- माइक्रो थर्मल- सूक्ष्म ताप वाली वनस्पति

4- हेकीस्टो थर्मल– ध्रुवीय वनस्पति

5- जीरोफाईट – मरुधभीद वनस्पति

  • कोपेन ने 1901 में वनस्पति को जलवायु का सारांश बताया ,उन्होंने 1918 में तापमान को आधार बनाते हुए जलवायु वर्गीकरण प्रस्तुत किया
  • कोपेन ने 1936 में तापमान और वर्षा के आधार पर संशोधित जलवायु वर्गीकरण प्रस्तुत किया

कोपेन ने संपूर्ण विश्व को 5 जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया

A-उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु प्रदेश

B-मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश

C-उपाद्र जलवायु प्रदेश

D- शीताद्र जलवायु प्रदेश

E-ध्रुवीय जलवायु प्रदेश

कॉपेन ने वनस्पति और आद्रता को दर्शाने के लिए अंग्रेजी वर्णमाला के अन्य अक्षरों का उपयोग किया |

W-मरुदभिड जीरोफाईट वनस्पति

S-स्टेप अतुल्य वनस्पति

h- दैनिक तापांतर

W-शीतकाल शुष्क

S-ग्रीष्म काल

G-गंगा बेसिन

कोपेन की जलवायु राजस्थान में ( Kopen Ka Jalvayu Vargikaran )

Kopen Ka Jalvayu Vargikaran
Kopen Ka Jalvayu Vargikaran

1-BWhw( उष्ण मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश)

जैसलमेर, बीकानेर ,गंगानगर, हनुमानगढ़

2-BShw (अर्द्ध स्टेप अतुल जलवायु प्रदेश)

बाड़मेर, जालौर, पाली ,सिरोही, जोधपुर, नागौर, सीकर झुंझुनू, चूरू

3-Cwg (शीत शुष्क मानसूनी जलवायु प्रदेश)

पूर्वी राजस्थान

4-Aw(उष्ण आर्द्र सवाना तुली जलवायु प्रदेश)

झालावाड़ ,कोटा , बारा ,बांसवाड़ा, डूंगरपुर ,उदयपुर प्रतापगढ़ ,माउंट आबू

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