Maria Montessori परिचय, विधि, पद्धति, 2022

Maria Montessori जीवन परिचय

Maria Montessori का जन्म सन 1870 में इटली में हुआ था

मांटेसरी शिक्षा पद्धति के जनक इटली की मैडम डॉ.मांटेसरी ने बालक की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर गहन अनुसंधान कार्य किए और इस अनुसंधान के आधार पर उन्होंने एक मनोवैज्ञानिक शिक्षण पद्धति प्रतिपादित की जिसे मांटेसरी शिक्षा पद्धति और मांटेसरी शिक्षा विधि नाम दिया गया।

मैडम Maria Montessori को नयी शिक्षा पद्धति, मनोवैज्ञानिक, क्रिया-प्रधान शिशु केन्द्रित शिक्षा का जन्मदाता माना जाता है । शिशु केन्द्रित उनकी व्यावहारिक शिक्षा पद्धति को आज भी किण्डर गार्डन मान्टेसरी विद्यालयों के नाम से अपनाया जा रहा है। शिक्षा को एक प्रक्रिया मानते हुए उन्होंने अपनी शिक्षा में 3 से 7 वर्ष की अवस्था के बच्चों की शिक्षा पर ज्यादा जोर दिया । इस महान् शिक्षाशास्त्री का निधन 1952 में हालैण्ड में हुआ ।

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मांटेसरी स्कूल किसे कहते है ?

  1. बालकों को शिक्षा प्रदान करने के लिए एक विशेष प्रकार की पाठशाला (स्कूल) आयोजित की जाती है। जिसका नाम ही मांटेसरी पाठशाला (स्कूल) है।
  2. इस पाठशाला में एक बाल भवन होता है, जिसमें बाल भवन में एक बड़ा कमरा होता है, और छोटे-छोटे अन्य कमरे भी होते हैं। यह जो बड़ा कमरा होता है, इसमें सभी प्रकार की आवश्यक सामग्री उपस्थित होती है।
  3. जबकि छोटे कमरों  में बालकों के विश्राम भोजन आदि की व्यवस्था होती है। इसके साथ ही बालकों के खेल-कूंद के लिए बगीचा उपलब्ध होता है,
  4. तो बाल भवन में सफाई आदि का भी कार्य बालक अपने हाथ से ही करते हैं, यही सब मांटेसरी पाठशाला कहलाती है।

मांटेसरी शिक्षा के प्रमुख लक्ष्य क्या है ?

Maria Montessori ने इस पद्धति में निम्न सिद्धांतों पर प्रमुख रूप से बल दिया है:-

बालक की स्वतंत्रता पर बल

जिसके अंतर्गत बालक को स्वतंत्रता प्रदान की जाती है, अर्थात बालक को खेलने की पूरी स्वतंत्रता होती है और बालक अपनी प्रवृत्तियों अपनी क्षमता के अनुसार खेलना, पढ़ना, लिखना जो कुछ भी चाहे कर सकता है। इस प्रकार की क्रियाओं के माध्यम से उसे आगे शिक्षा दी जाती है।

खेल द्वारा शिक्षा पर बल देना

इसके अंतर्गत बालक को खेल द्वारा शिक्षा प्रदान करने का प्रयत्न किया जाता है। क्योंकि कहा जाता है,  कि बालकों की दृष्टि से खेल एक ऐसी प्रभावशाली नीति है जिसमें सभी बच्चे रूचि लेते है और इसमें बाल भवन की योजना की जाती है। जिसमें छोटे बच्चों के भोजन विश्राम गोष्टी और शारीरिक क्रिया के लिए पृथक रूप से व्यवस्था रहती है।

Maria Montessori पद्धति की शिक्षण

भाषा की शिक्षा

मांटेसरी शिक्षा पद्धति के हिसाब से  लिखना पढ़ने की अपेक्षा अधिक सरल है। इसके अनुसार लिखने में उच्चारण की आवश्यकता नहीं पड़ती इसलिए  बालक लिखना सरलता से सीख सकता है किन्तु पड़ना कठिनता से

कर्मेंद्रियों की शिक्षा

बाल भवन में सभी कार्यों को बालक स्वयं करते हैं, इस प्रकार उनका हाथ, मुंह ,धोना , कपड़े बदलना, सफाई करना आदि, सभी कार्यों का हाथ से करने के कारण उनका पूर्णरूपेण शारीरिक व्यायाम हो जाता है और शरीर की माँसपेशियाँ पुष्ट होती हैं।

ज्ञानेंद्रियों की शिक्षा

इसमें बालकों को ज्ञानेंद्रियों द्वारा जितने अधिक अनुभव होंगे वे उतने ही अधिक सीखेंगे आता Maria Montessori ने स्वयं कहा है, कि ज्ञानेंद्रियों की शिक्षा संबंधी क्रियाओं का यह एक उद्देश्य नहीं है कि बालकों में विभिन्न बस्तुओं के रूप गुण और वर्ण का  ज्ञान हो बल्कि उनसे उनके ज्ञानेंद्रियों को परिष्कृत करना चाहते हैं जिससे उनकी बुद्धि का विकास हो।

मांटेसरी शिक्षा पद्धति (विधि) के गुण और दोष

  1. Maria Montessori शिक्षा पद्धति ऐसी शिक्षा पद्धति है, जिसमें  विशेषत: निर्देशन में वैयक्तिकता का स्थान है। इसके अतिरिक्त इस पद्धति में वैयक्तिकता को ही ध्यान में नहीं रखा जाता है।
  2. जबकि यह कर्म इंद्रियों की शिक्षा स्वयं शिक्षा भाषा शिक्षण आदि की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मांटेसरी पद्धति में खर्च अधिक है ।
  3. इसलिए अधिक खर्चीली होने से निर्धन देशों के लिए मांटेसरी पद्धति उपयोग में नहीं लायी जाती है। मांटेसरी पद्धति छोटे बालकों के लिए अधिक उपयोगी होती है।
  4. जबकि उच्च शिक्षा ग्रहण करने बाले बालकों के लिए यह प्रयोग में नहीं लायी जाती।
  5. मांटेसरी पद्धति में इंद्रियों के प्रशिक्षण पर अधिक बल दिया जाता है। किंतु छोटे बच्चों के उच्चारण शुद्धि पर विशेष बल नहीं दिया जाता ऐसे छोटे बच्चों में तोतलापन बना रहता है।

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