What is micro teaching? 2022

Micro Teaching क्या है?

Micro teaching का प्रारम्भ सन् 1961 से माना जाता है, लेकिन सर्वप्रथम सूक्ष्म शिक्षण का नामकरण 1963 ईस्वी में डी. एलन (डा. ड्वाइट एलन) ने स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय अमरीका में किया। अमेरिका के स्टेनफार्ड विश्वविद्यालय में राबर्ट बुश व डाक्टर एलन के निर्देशन में कीथ व एचीसन नामक छात्रों ने वीडियो टेप के माध्यम से अध्यापन कर शीघ्र प्रतिपुष्टि प्राप्त कर लेने पर बल प्रदान किया।

इसके उपरान्त हेरी गैरीसन और कैलिन बैक महोदय ने अपने-अपने प्रयासों से सूक्ष्म-शिक्षण  micro teachings का प्रतिपादन किया । इसमे एक कौशल हेतु 5-10 मिनट तक की पाठ योजना तैयार की जाती है। माइक्रो टीचिंग में कक्षा का आकार भी छोटा रहता है (5-10 विद्यार्थी)।

एक सूक्ष्म शिक्षण , शिक्षण का एक लघु रूप है। यह एक प्रयोगशालीय विधि है। जिसके माध्यम से शिक्षक प्रशिक्षणार्थियों में शिक्षण कौशल विकसित किये जाते है। शिक्षण को यहाँ कई शिक्षण कौशलों का योग माना गया है।

प्रशिक्षणार्थी को ये शिक्षण कौशल नियंत्रित वातावरण में एक-एक कर के सिखाये जाते हैं। वह इन सभी कौशलों को सीख लेता है, तब इन्हें वह आवश्यकतानुसार जोड़कर पूरा शिक्षण करता है। यही कारण है कि इसे अनुक्रम अवरोही शिक्षण सम्पर्क कहा गया है।

Micro teaching के सिद्धान्त

  1. यह वास्तविक कौशल है।
  2. इसमें एक समय में एक ही कौशल के प्रशिक्षण पर बल दिया जाता है।
  3. अभ्यास की प्रक्रिया पर नियंत्रित रखा जा सकता है।
  4. पृष्ठपोषण के प्रभाव की परिधि विकसित होती है

Micro teaching के उद्देश्य

  • छात्राध्यापक में आत्मविश्वास की भावना में बृद्धि होती है।
  • छात्राध्यापक को एक – एक करके विभिन्न कौशल शिक्षण में निपुणता प्राप्त होती है।
  • छात्राध्यापक द्वारा जो त्रुटियाँ शिक्षण में की गई हैं उनको दूर करने का पूर्ण अवसर मिलता है।
  • छात्राध्यापक को तुरंत ही पृष्ठपोषण प्राप्त हो जाता है।

सूक्ष्म शिक्षण की विशेषताएँ

  • सूक्ष्म शिक्षण के द्वारा कम समय में अधिक दक्षता प्रदान किया जाता है।
  • सूक्ष्म शिक्षण में शिक्षण के तत्व को सूक्ष्म स्वरूप दिया जाता है।
  • सूक्ष्म शिक्षण के द्वारा शिक्षकों में व्यावसायिक परिपक्वता का विकास होता है।
  • सूक्ष्म शिक्षण के द्वारा छात्रों को तत्काल प्रतिपुष्टि प्राप्त हो जाती है।

सूक्ष्म शिक्षण की अवस्थाएँ

1.ज्ञान प्राप्ति अवस्था

ज्ञान प्राप्ति अवस्था में छात्राध्यापक विभिन्न शिक्षण कौशलों का ज्ञान प्राप्त करता है जिसका उसे प्रशिक्षण प्राप्त करना है।

2.  कौशल प्राप्ति अवस्था

कौशल प्राप्ति अवस्था में छात्राध्यापक प्रदर्शन पाठ को देखने के बाद सूक्ष्म शिक्षण हेतु पाठ्य योजना का निर्माण करता है। तथा तब तक उस कौशल का अभ्यास करता है जब तक वह उस कौशल में दक्षता प्राप्त न कर ले।

इस अवस्था के दो घटक महत्वपूर्ण हैं –

  1. प्रतिपुष्टि अवस्था
  2. सूक्ष्म शिक्षण नियोजन अवस्था
  3. स्थानान्तरण अवस्था

स्थानान्तरण अवस्था में छात्राध्यापक सूक्ष्म शिक्षण द्वारा सीखें गए कौशलों का वास्तविक कक्षा की परिस्थितियों में स्थानान्तरण करता है। तथा शिक्षण क्रिया को पूर्ण करता है।

सूक्ष्म शिक्षण चक्र

micro teaching
Micro teaching

सूक्ष्म शिक्षण की प्रक्रिया

     1.पाठ्ययोजना निर्माण

छात्राध्यापक को शिक्षण कौशल (वर्णन करना, व्याख्या करना, प्रश्न पूंछना आदि) किसी एक कौशल जिसे प्रशिक्षण के दौरान सीखना होता है कि सूक्ष्म शिक्षण पाठ्ययोजना तैयार की जाती है।

  1. कक्षा शिक्षण

छात्राध्यापक छोटे पाठ को सहयोगी छात्रों को 5 से 10 मिनट तक पढ़ाता है जिसे शिक्षण सत्र कहते हैं।

  1. प्रतिपुष्टि

छात्राध्यापक द्वारा पढ़ाये गए पाठ का प्रवेक्षक द्वारा विकसित मूल्यांकन प्रपत्र में दी गई जानकारी जिसमें छात्राध्यापक द्वारा शिक्षण में छोड़ी गई कमियों का उल्लेख होता है। इस प्रतिपुष्टि से छात्राध्यापक अपने कमियों को सुधारता है।

  1. पुनः पाठ्यनिर्माण

प्रतिपुष्टि के तुरंत बाद छात्राध्यापक अपने पाठ्य को पुनः नियोजित करता है इस क्रिया को पुनर्योजन सत्र कहते हैं।

 

  1. पुनः योजना

पुनः योजना के पश्चात पुनः योजित पाठ दूसरे समूह पर पुनः शिक्षण द्वारा कराया जाता है। इस सोपान को पुनः शिक्षण सत्र कहते हैं।

    6.पुनः प्रतिपुष्टि

पुनः शिक्षण के उपरांत प्रवेक्षक द्वारा छात्राध्यापक को प्रतिपुष्टि प्रदान की जाती है इस प्रक्रिया द्वारा छात्राध्यापक निरन्तर अपनी कमियों में सुधार लाता है।

विभिन्न प्रकार के शिक्षण कौशल (Different Types of Teaching Skill )

(1) प्रस्तावना कौशल

(2) प्रश्न रचना कौशल

(3) प्रश्न पूछने का कौशल

(4) उद्दीपन परिवर्तन कौशल

(5) पुनर्बलन कौशल

(6) उदाहरणों द्वारा स्पष्टीकरण कौशल

(7) श्यामपट्ट लेखन कौशल

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