RTE ACT 2009 शिक्षा का अधिकार अधिनियम पृष्ठभूमि, अध्याय (धारा 1 – 38 )

शिक्षा का अधिकार ( RTE ACT 2009)

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009

RTE ACT 2009 पृष्ठभूमि

भारत के संविधान में नीति निदेशक तत्व के अंतर्गत अनुच्छेद 45 में शिक्षा के अधिकार का उल्लेख है जिसमें यह लिखा हुआ है कि
10 वर्ष के भीतर 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा के लिए प्रयास करेगी।

1986 की शिक्षा नीति

राजीव गांधी सरकार के समय 1986 की शिक्षा नीति आती है और इस नीति में मुख्य रूप से दो उद्देश्य लेकर चलते हैं

  1. नामांकन
  2. ठहराव
राममूर्ति समिति 1990  ( इस समिति द्वारा 4 सुझाव दिए गए जिसमें –
  1. नामांकन
  2. ठहराव
  3. बच्चों की स्कूल तक भौतिक पहुंच
  4. शिक्षक व विद्यालय की उपलब्धता
UN का बाल अधिकार घोषणा पत्र 1992

इस पत्र पर 6 से 18 वर्ष तक के बालकों को निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा देने वाले देशों में हस्ताक्षर करते हुए भारत 135 वा देश बना।

मो. हिनी जैन वर्सेस कर्नाटक राज्य वाद

मो. हिनी जैन यहां एक मेडिकल छात्रा थी उस समय मेडिकल के लिए अन्य राज्य से होने पर 60,000 डोनेशन तथा कर्नाटक राज्य होने पर 25000 देने पर एडमिशन दिया जाता था।
यह बात यह बात हिंदी जैन को सही नहीं लगी और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में इसके विरुद्ध याचिका दायर की।

उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश राज्यवाद 1993

इस बात में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार से संबंधित है।

तपस मजूमदार समिति 1999

जब कोर्ट द्वारा निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा को कानूनी मान्यता मिल ही गई है तो एनडीए सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया क शिक्षा का अधिकार का प्रावधान किया जाना चाहिए।

इस समिति की सिफारिश पर शिक्षा का अधिकार देने के लिए 86 वा संविधान संशोधन 2002 होता है।

86 वा संविधान संशोधन 2002

86 वा संविधान संशोधन 2002 के अंतर्गत निम्नलिखित संशोधन किए गए।

  1. मूल अधिकार – मूल अधिकार में अनुच्छेद 21(A) जोड़ा गया। जिसमें जिसमें 6 से 14 वर्ष तक के बालकों के लिए निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा देने के लिए कार्य करेगी।
  2. .नीति निदेशक तत्व – नीति निदेशक तत्व में अनुच्छेद 45 में परिवर्तित करके 0 से 6 वर्ष तक के बालकों के लिए उचित शिक्षा व देखभाल की व्यवस्था करने का प्रयास करेंगी।
  3. कर्तव्य -कर्तव्य के अंतर्गत अनुच्छेद 51 (1 )जोड़ा जिससे मैं 11 मूल कर्तव्य सम्मिलित किया गया ।

निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम

राज्यसभा द्वारा 26 जुलाई 2009 को RTE बिल को मंजूरी दी गई इसके बाद 4 अगस्त 2009 को लोकसभा द्वारा भी पारित कर दिया गया 
26 अगस्त 2009 को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के हस्ताक्षर के बाद शिक्षा का अधिकार अधिनियम बन गया
1 अप्रैल 2010 को भारत शिक्षा का अधिकार लागू करने वाला 135 व देश बन गया

शिक्षक की भूमिका

  1. पाठ्यक्रम को समय अनुसार पूर्ण करवाना. समय सारणी के अनुसार चलान ।
  2. अध्यापकों द्वारा निर्धारित नियमों का पालन कराना।
  3. इसके अलावा अध्यापकों का यह मुख्य कर्तव्य है कि वे विद्यार्थियों के अभिभावकों के साथ समय समय बैठक करें  एवं उनकी प्रगति से संबंधित उनकी जानकारी से अभिभावकों को अवगत कराएं।

 

राजस्थान के संदर्भ में

राजस्थान राज्य में 29 मार्च 2011 को विधानसभा द्वारा संशोधन प्रस्ताव पारित किया गया और 1 अप्रैल 2011 को राजस्थान में लागू किया गया

अध्याय-1 प्रारंभिक परिचय (धारा 1 व धारा 2 )

धारा 1 –

1 अप्रैल 2010 को जम्मू कश्मीर को छोड़कर संपूर्ण भारत में लागू किया गया
Note – act मदरसा , वैदिक पाठशाला व धार्मिक प्रशिक्षण देने वाले विद्यालय में यह लागू नहीं है

धारा 2 : परिभाषा

1.समुचित सरकार : केंद्र सरकार व राज्य सरकार
2.वंचित बालक
3.अभावग्रस्त बालक
4.स्थानीय अभिभावक
5.विद्यालय
6.बालक
7.प्रारंभिक शिक्षा

अध्याय 2 – निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (धारा 3 – 5)

धारा 3 –

प्रावधान किया गया है कि 6 से 14 वर्ष का कोई भी बालक शिक्षा से वंचित ना हो 6 से 14 वर्ष के बालक के लिए निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाएगी

धारा 4 –

आयु के आधार पर प्रवेश
शैक्षणिक स्तर को पूरा करने के लिए 6 माह का ब्रिज कोर्स की व्यवस्था की जाएगी

धारा 5 –

स्थानांतरण से संबंधित बालक के विद्यालय स्थानांतरण के साथ बालक के सभी अधिकारों का स्थानांतरण किया जाएगा

अध्याय 3 – समुचित सरकार व माता पिता के कर्तव्य (6-11)

धारा 6 –

विद्यालयों की स्थापना

समुचित सरकार का कर्तव्य है कि समय पर स्थिति व आवश्यकता के अनुसार विद्यालयों की स्थापना करेगी RTE एक्ट 2009 के प्रावधान के अनुसार प्रत्येक 1 से 1. 5 किलोमीटर ने प्राथमिक विद्यालय का , 2 किलोमीटर से 2.5 किलोमीटर के दायरे में उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले जाएंगे

धारा 7 –

  • केंद्र व राज्य का वित्तीय अनुपात
  • केंद्र व राज्य का अनुपात क्रमशः 60 : 40 ,पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अनुपात 90 : 10 होगा

नोट – 2018 से पूर्व पूर्वोत्तर राज्यों की संख्या 7 (असम, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड मणिपुर ,मिजोरम) राज्य हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड को भी सम्मिलित किया गया जिसमें वित्तीय अनुपात 90:10 रखा गया

धारा 8 –

समुचित सरकार के अधिकार व कर्तव्य क्या क्या होंगे धारा 9 – समुचित सरकार के अधिकारी वर्ग के अधिकार तथा कर्तव्य क्या-क्या होंगे

धारा 9-

समुचित सरकार के अधिकारी वर्ग के अधिकार तथा कर्तव्य क्या-क्या होंगे

धारा 10 –

इस धारा में स्थानीय अभिभावक 6 से 14 वर्ष के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने हेतु प्रेरित करें

धारा 11 –

6 वर्ष के बालकों के लिए समुचित सरकार व्यवस्था करेगी

अध्याय 4 – विद्यालय एवं शिक्षकों के कर्तव्यों का उल्लेख (12-28 )

धारा 12 –

सभी निजी शिक्षण संस्थान में कुल छात्रों का 25% सीटों पर निर्धन वर्ग के उन बच्चों के लिए आरक्षित रखा जाएगा जिनके अभिभावक की वार्षिक आय 2 लाख से कम

धारा 13 –

प्रवेश के समय किसी भी प्रकार का शुल्क या प्रवेश शुल्क नहीं लिया जाएगा

धारा 14 –

दस्तावेज के अभाव में प्रवेश देने से मना नहीं किया जाएगा

धारा 15 –

प्रवेश की अंतिम तिथि 30 सितंबर है किंतु बालक संपूर्ण वर्ष के दौरान कभी भी प्रवेश ले सकता है

धारा 16 –

प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण होने पर बालक को किसी भी स्तर पर रोक नहीं लग सकती है

धारा-17-

बालक का शारीरिक व मानसिक शोषण नहीं किया जा सकता है

धारा 18 –

विद्यालय सरकार द्वारा तय मानकों को पूरा करती है उसी विद्यालय संचालन की अनुमति दी जाएगी

धारा 19 –

विद्यालय संगठन जो समुचित सरकार के परिवर्तित मांगों को पूरा नहीं करता है तो विद्यालय संगठन की मान्यता रद्द कर दी जाएगी

धारा 20 –

समुचित सरकार का यह अधिकार है कि कई मांगों को परिवर्तित कर सकती है

धारा 21-

  • विद्यालय प्रबंधन समिति यह प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक विद्यालय को विद्यालयों का प्रबंधन तथा नियंत्रण करने हेतु स्थानीय अभिभावकों को संबोधित करते हुए विद्यालय प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगाभारत में
  • निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा की सर्वप्रथम मांग गोपाल कृष्ण गोखले के द्वारा की गई उन्होंने 18 मार्च 1910 को इंपीरियल लेजिस्लेटिव असेंबली में इसका प्रस्ताव रखा जिसे ब्रिटिश सरकार ने स्वीकार नहीं किया

धारा 22-

शाला प्रधान द्वारा सत्र प्रारंभ करने से पूर्व अपने प्रारंभिक स्तर की शिक्षा में सुधार करने हेतु अल्पकालीन प्रपत्र में वार्षिक विकास योजना का प्रारूप तैयार करें जिसे संस्थागत नियोजन कहते ह

धारा 23-

शिक्षकों की योग्यता अयोग्यता  क्या होगी ?

धारा 24-

शिक्षकों के दायित्व का उल्लेख किया गया है कि प्रत्येक शिक्षक को आदर्श व नैतिक चरित्र वाला होना चाहिए

धारा 25-

छात्र व शिक्षक के अनुपात के बारे

प्राथमिक स्तर

  •  छात्र शिक्षक  ( 30:1  )
  • छात्र संख्या 200 से अधिक हेतु 40:1
  • कार्य  दिवस – 200 दिन
  • कार्य घंटे – 800 घंटे

उच्च प्राथमिक स्तर 

  • छात्र शिक्षक  (35  :   1
  • कार्य  दिवस – 220
  • शिक्षण घंटे – 1000
बच्चे ( कक्षा 1 से 5 तक) शिक्षक
40 बच्चे पर एक शिक्षक
60 बच्चों पर 2 शिक्षक
61 से 90 बच्चों पर 3 शिक्षक
91  से 120 बच्चों पर 4 शिक्षक 
121 से 150 बच्चों पर 5 शिक्षक
150 से 200 विद्यार्थियों पर 5 शिक्षक व एक प्रधानाध्यापक होना अनिवार्य है
200 से अधिक विद्यार्थियों पर 40 :1 

धारा 26-

किसी भी विद्यालय में 10% से अधिक पद खाली नहीं होने चाहिए

धारा 27-

शिक्षण के अतिरिक्त अन्य कार्य में नहीं लगाया जा सकता  ( केवल जनगणना, निर्वाचन , राष्ट्रीय आपदा )

धारा 28-

शिक्षक  निजी कार्य अथवा ट्यूशन नहीं करवा सकता

अध्याय 5 प्रारंभिक शिक्षा के पाठ्यक्रम को पूरा किया जाना ( धारा  29-30)

धारा 29-

  • प्रारंभिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा परिवर्तन की स्थिति में समाचार पत्रों में सूचना देना अनिवार्य है
  • पाठ्यक्रम निर्माण कर्ताओं के कर्तव्य व दायित्व का उल्लेख किया गया
  • पाठ्यक्रम में ऐसी कोई वस्तु शामिल ना हो जो समाज जाति धर्म में समाहित हो

धारा 30-

  • प्रारंभिक शिक्षा को पूर्ण करने बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जाएगा
  • 8 वी बोर्ड परीक्षा केवल प्रमाण पत्र जारी परीक्षा होगी

अध्याय 6 – बालकों के अधिकार का संरक्षण धारा (31-34 )

धारा 31-

  • बाल अधिकार के हनन के संबंध शिकायत की प्राप्ति का उल्लेख किया गया
  • बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किया जाएगा

धारा 32-

  • धारा 31 के खिलाफ शिकायत दर्ज की बच्चों के अधिकारों का हनन होने पर लिखित शिकायत दर्ज की जाएगी
  • 3 माह में शिकायत दूर की जाएगी

धारा 33-

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठनकेंद्रीय सलाहकार परिषद का गठन

कुल  सदस्य – 15 अध्यक्ष – केंद्रीय शिक्षा मंत्री

धारा 34-

राज्य स्तर पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन

  • राज्य सलाहकार परिषद- 2 वर्ष कार्यकाल
  • महिला सदस्य 5
  •  3 माह में बैठक
  • अध्यक्ष राज्य शिक्षा मंत्री

अध्याय 7 प्रकीर्ण (35-38)

धारा 35-

अधिनियम लागू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने का अधिकार पूरा होगा

धारा 36-

कर्मचारियों की गलत व्यवहार पर शिकायत दर्ज की जाएगी

धारा 37

धारा 36 के तहत की गई शिकायत की सभा व निष्पक्षता के साथ कार्यवाही की जाएगी

धारा 38-

RTE ACT 2009 के सभी धाराओं में परिवर्तन करने का अधिकार है

 

अभिभावक तथा सरक्षक का दायित्व है कि वह 6 से 14 वर्ष तक के बालकों को निशुल्क व अनिवार्य शिक्षा देने के लिए विद्यालय भेजेंगे तथा प्रेरित करेंगे।

देश की आजादी के समय जब संविधान का निर्माण हुआ , तो तीन प्रकार की कार्यसूची निर्धारित की गई ।

  1. संघ सूची
  2. राज्य सूची
  3. समवर्ती सूची

उनके आधार पर शिक्षा को राज्य सूची का विषय बना बनाया गया परंतु राज्यों के माध्यम से शिक्षा का प्रचार प्रसार ठीक प्रकार से  नहीं हो पाया ।

तब 1976 में 42वां संविधान संशोधन किया गया और शिक्षा को समवर्ती सूची में जोड़ा फिर भी भारत देश में शिक्षा का प्रचार प्रसार उचित पैमाने पर नहीं हो रहा था ।

तब वर्ष 2002 में 86 वा संविधान संशोधन करवाया गया और शिक्षा को बालक का मौलिक अधिकार बना दिया| इसके लिए संविधान में अनुच्छेद 21 A सृजित  हुआ ।

  • अभिभावक एवं सरकार के लिए अनुच्छेद 51 के उपबंध मैं इसे कर्तव्य घोषित किया गया।
  • 2004 में भारतीय शिक्षा मंडल ने एक विशेष प्रकार की शिक्षा विधेयक को लाने के सुझाव दिए लेकिन तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार ने 2005 में इसे वापस लौटा दिया ।
  • वर्तमान RTE -2009 के लिए 20 जुलाई 2009 को राज्यसभा में तथा 4 अगस्त 2009 को लोकसभा ने विधेयक को पारित किया उसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के हस्ताक्षर से यह देश के लिए कानून बना ।
  • 1 अप्रैल 2010 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसे जम्मू कश्मीर राज्य के अलावा संपूर्ण देश में लागू कर दिया
  • RTE-2009 की धारा 38 का लाभ लेते हुए तत्कालीन राजस्थान सरकार ने 29 मार्च 2011 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में इसमें संशोधन किया और एक अप्रैल 2011 से राजस्थान में संशोधित RTE निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2011 के नाम से लागू हुआ ।

 

RTE की महत्वपूर्ण धाराएं

धारा 1 – Title

धारा 2 – महत्वपूर्ण परिभाषा

धारा 3 – 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बालक बालिकाओं को आठवीं तक की निशुल्क शिक्षा उपलब्ध करवाना

धारा 4 – आयु के   आधार पर बालक को शिक्षा में प्रवेश किया जाना तय किया गया

धारा 5 – किसी भी बालक को सत्र में कभी भी अन्य विद्यालय में स्थानांतरण का अधिकार होगा इसे विद्यालय रोक नहीं सकेगा

धारा 10 -बालकों को शिक्षा दिलवाना माता-पिता एवं अभिभावक का दायित्व होगा

धारा 12 -निजी शिक्षण संस्थानों में 35% 25% सीटों पर गरीब एवं अभावग्रस्त बालकों का प्रवेश

धारा 13 – निजी विद्यालय किसी भी प्रकार का डोनेशन (सहयोग) शुल्क नहीं ले सकेंगे

धारा 17 -बालकों को किसी भी प्रकार का शारीरिक/मानसिक नहीं दिया जाएगा

धारा 21 -प्रत्येक उच्च प्राथमिक विद्यालय SMC (स्कूल मैनेजमेंट कमिटी) का गठन करेगा जिसमें 75% लोग अभिभावक होंगे तथा अभिभावकों में 50% महिलाएं होगी वर्तमान में कुल 16 अभिभावक 12 महिला थी

धारा 23 -शिक्षक पात्रता एवं योग्यता का निर्धारण  के लिए केंद्र में CTET एवं राज्यों में STET (राजस्थान में RTET/REET) परीक्षाएं

धारा 28 -शिक्षक ट्यूशन नहीं करेगा निजी शिक्षण पर रोक

धारा 29– पाठ्यक्रम सुधार एवं जीवन केंद्रित बनाने का प्रयास

धारा 30– आठवीं बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त

धारा 38 -कोई भी राज्य चाहे तो इस कानून में अपने स्तर पर राज्य लोक हित में संशोधन कर सके कर सकेगा

अन्य जानकारियां

  • इसी कानून में तय किया गया है कि देश में कोई भी निजी विद्यालय बिना मान्यता के संचालित नहीं होगा और अगर ऐसा पाया गया तो प्रतिदिन 10000 के हिसाब से अर्थ दंड देना होगा तथा 10 दिन से अधिक बिना मान्यता की विद्यालय चलने पर उसे सजा भी हो सकती है
  • निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए यदि कोई विद्यालय प्रवेश परीक्षा का आयोजन करता है तो उस पर पूर्ण पाबंदी रहेगी और फिर भी कोई विद्यालय ऐसा करता है तो उसकी आर्थिक दंड था मान्यता समाप्ति की कार्यवाही होगी
  • अनुसार ही प्राथमिक स्तर के विद्यालय 1 सप्ताह में 200 दिन में 800 कालांश काला और उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यालय 220 दिन में 1000 कालांश का आयोजन करेंगे

 

 

 

 

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